Film making tutorial in hindi,पहली शोर्ट फिल्म कैसे बनायें,ਆਪਣੀ ਫਿਲਮ ਖੁਦ ਬਨਾਓ,فلم کیسے بنیں

हेलो अगर आप शॉर्ट फिल्म या नाटक करने की तैयारी कर रहे हैं | जितना आपको मुश्किल यह लग रहा है उतना है नहीं क्योंकि इनकी अगर सही ढंग से तैयारी की जाए इस की जरूरतों को समझा जाए तो यह बहुत कम खर्चे में बहुत आसानी से बन सकती है यदि आप इसकी प्लानिंग ठीक से नहीं  करेंगे तो यह आपके लिए बहुत टेंशन बन जाएगा की लास्ट मोमेंट पर आपका बहुत सारी चीज़ें कंट्रोल में नहीं रहेंगी खर्चा ज्यादा हो जाएगा और बाद में भी हो सकता है प्रोजेक्ट भी अधूरा रह जाए

पर आपको एक बात बताऊँ आप एक छोटे स्टैंड पर मोबाइल ग्रिप , दो साधारण लाइटें  और एक कम्पुटर के बारे एक फिल्म बनाने के बारे में सोच सकते है . यह मैंने किया भी है |

तो आज मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं आपके लिए शॉर्ट फिल्ममेकिंग और थिएटर यानी नाटक   को खेलना इनके ऊपर आपको दो सीरीज दूंगा एक तो शोर्ट फिल्म की और एक नाटकों के मंचन करने के लिए |
तो पहले दो एपिसोड मैं आपको दे रहा हूं जिसमें एक में सफल शॉर्ट फिल्म बनाने की पूरी प्रकिर्या के ढांचे यानि स्केलटन को समझेंगे | और एक में नाटक के मंचन की की पूरी प्रकिर्या . इसी पर बाद में उसके बारीक पॉइंट्स पर 5-5 एपिसोड आपको दूंगा
तो सबसे पहले हम शुरु करते हैं शॉर्ट फिल्म के लिए | यदि आप खुद ही शॉर्ट फिल्म को बनाना चाहते हैं और आपको लग रहा यह कैसे करेंगे कैमरामैन कहां से लाएंगे लाइट्स , स्टैंड और शूटिंग करने वाला स्टाफ कहां से लाएंगे खर्चा कहां से निकलेगा स्क्रिप्ट कैसे बनेगी यह सब चीजें एकदम मुश्किल लगती है | आपको बताता हूं की शार्ट फिल्म के लिए यह इतनी मुश्किल चीजें नहीं अगर आप प्लानिंग करें| सबसे पहले आप कागज और पेन लेकर अपने एक एक पॉइंट को बिंदु को क्लियर करें जैसे

आपको किस विषय पर फिल्म बनानी है और हमेशा वह सब्जेक्ट लें  जो आप को बनाने के लिए कम खर्चीला और आसान लगे| जब आप एक सफल फिल्म बना लेंगें तो आप में फिल्म  की बारीकियों का अनुभव हो जायेगा | जो आपकी अगली बड़ी फिल्म में बहुत काम आयेगा. किसी भी लेखक निर्देशक के लिए पहली फिल्म बहु बहुत महत्वपूर्ण होती है |विषय चुने समय देखिये की एक  आउटडोर शूटिंग की इसमें कई तकलीफें आ सकती हैं ,मसलन आउटडोर में नए एक्टर नर्वस  होते हैं और एक्सप्रेशन वह नहीं दे पाते  जो फिल्म को चाहिए , टेक ज्यादा होते हैं, समय ज्यादा लगता है हो सकता है आपको परमिशन भी लेनी पड़े | खर्च बढ़ जाता है.तो पहली फिल्म के लिय बेहतर होगा अगर आप इंडोर  सब्जेक्ट चुनें |  यह एक फैमिली ड्रामा हो सकता है फ्रेंडस की किसी बात बात पर बातचीत या बहस हो सकती है | पहली फिल्म आप किसी सामाजिक सन्देश पर बातचीत को लेकर बनाएं तो ज्यादा अच्छा  रहेगा  | अगली बात आती है इसकी अवधि यानि DURATION कितनी हो.  शुरू में अगर आप 5 मिनट की शॉर्ट फिल्म बनाएंगे उसके लिए दो दिन की शूटिंग लग सकती है . कोशिश कीजिये एक दिन में शूटिंग हो जाये. इसके बहुत फायदे है. जो विस्तार वाले एपिसोड में बताऊंगा | कहानी की लम्बाई कितनी होगी यह जाने के लिए  स्क्रिप्ट को धीमी रीडिंग करें लगभग उठें ही duration की फिल्म होगी  | शूटिंग में लगभग दो दिन लगने का कारन,केमरे की प्लेसमेंट लॉन्ग  शॉट , मिड शॉट और  क्लोज अप के अनुसार बदलनी पड़ती है चेहरे के एक्सप्रेशन है वह शूटिंग के अंदर बार बार लेने पड़ते हैं | जैसे किसी ने किसी को गुस्से की बात की तो दूसरे के चेहरे पर जो एक नाराजगी आएगी उसको लेना है तो यह इस तरह के कामों के अंदर बहुत सारा टाइम चला जाता है तो मेरा अंदाजा है कि 5:00 मिनट की एक औसत  फिल्म बनाने के लिए आप को  2 दिन लग सकते हैं अगर आप एक दिन में पूरा करें तो यह आपको काफी तकनिकी फायदे देगी जो अगले एपिसोड में डिस्कस करेंगे |
अब आती  हैं लाइटिंग| पहली फिल्म के लिए इंडोर में दो लाईट और दो रिफ्लेक्टर रखिये | इंडोर में  लाइटिंग आपके जरुरत के हिसाब से कंट्रोल में रखिये  |  लाईट सादी भी चलेगी और रिफ्लेक्टर की जागह सफ़ेद ड्राइंग शीट  से बना लीजिये | नेचुरल लाईट को कम इस्तेमाल करें क्यूं की यह दिन के समय के साथ बदलती रहती है और  एडिटिंग में बहुत जर्क देगी और आप बाद में पछतायेंगे |

पहली फिल्म के लिए सबसे सुलभ सेट ड्राइंग रूम है जो अक्सर घरों  में होगा  क्योंकि करीब-करीब सारी चीजें लगी लगाईं मिल जाएँगी खर्चा , मेहनत और समय की बचत होगी और सेट को थोडा इधर उधर करके काम बन जायेगा |इंडोर के कारण एक्टर को भी चेहरे का एक्सप्रेशन देने में कम दिक्कत होगी |

अब आता है कलाकारों का चुनाव तो कलाकारों के चुनाव में आप अपने दोस्तों मित्रों में से ऐसे लोगों को चुने जिनका करेक्टर लगभग वैसा ही है जैसा आप चित्रित कर रहे हैं या उनको मन में रखकर स्क्रिप्ट लिख लीजिये | इससे आप को उनके ऊपर बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ेगी बहुत सारे टेक नहीं लेने पड़ेंगे | आपका काम जल्दी हो जाएगा और जो कलाकार है जो उसमें रोल कर रहा है वह भी उस को एंजॉय करेगा |

 

अब आता है स्क्रिप्ट | स्क्रिप्ट में आप डाईलाग के साथ हर पात्र और उसके स्वभाव का विवरण भी दे | स्क्रिप्ट की कॉपी मोटे और खुले अक्षरों में एक प्रिंट करा लें और उसको जेरोक्स करा लें| एक्टरों का हरेक का नाम उसकी  स्क्रिप्ट पर लिख कर दीजिये और हिदायत दीजिये की स्क्रिप्क न गुमेगी न दुसरे से बदलेगी, इसका कारण में आपको बाद में बताऊंगा एक स्क्रिप्ट पर मास्टर कॉपी लिखकर डायरेक्टर के पास रहेगी जो कोई नहीं लेगा | हर पात्र अपने रोल को अपनी स्क्रिप्ट में लाल स्याही से अंडरलाइन कर लेगा ताकि उसका रोल जहाँ जहाँ आ रहा है उसकी उसे इतियाद रहेगी .

इनको याद करने के बाद एक सिटिंग रीडिंग दी जाएगी  फिर खड़े होकर और फिर उसके पात्र के हिसाब से | दो बार सिटींग  के अंदर पूरी रीडिंग करने के बाद आप उसको थर्ड रीडिंग स्टैंडिंग में करवाइए शरीर को मूवमेंट देना जैसे कोई चल चलकर करता है तो वह आप थोड़ा कनेक्शन होने लगेंगे  इसके बाद उनको पात्र खेलते हुए मूवमेंट दीजिये अनके अपने साधारण ड्रेस में ही | अगर वह चाहे तो पात्र का कुछ चिन्ह जैसे गमछा डाल सकता है या काला चश्मा या लड़की है तो कॉलेज की किताब लेकर आ सकती है कॉलेज से आ रही है इसका एक ऐसा प्रॉपर्टी दे दी जाय तो फील आती है

कलाकार द्वारा डाईलाग भूलने की समस्या का बहुत बढ़िया हल है कि आप कलाकारों को सारी सिचुएशन को समझने के बाद उन्हीं के अपने उतने ही लम्बाई के डाईलाग अपने ढंग से बोलने की छूट दें और इससे मेरा अनुभव यह कहता है कि इससे चीज निखरती है क्योंकि वह अपने अंदर से बोल रहा होता है वह मैकेनिकल नहीं बोल रहा होता है |

इसके बाद आप कैमरामैन लाइट मैन एंड साउंड वाले बन्दे को भी एक एक कॉपी देंगे

कैमरामैन और प्रोडक्शन – यह सबसे महत्वपूर्ण काम है . काम में क्वालिटी आना बहुत कुछ इस काम पर निर्भर  करता है  |  जैसे कोई पहले लॉन्ग शॉट 3 लोग बैठे हुए थे उसके बाद उसमें से एक पात्र एक डायलॉग बोला तो आप उसका एक्सप्रेशन लेने के लिए क्लोज अप पर जाते हैं तो आपको हर बार कैमरा उसके नजदीक ले जाने की जरूरत नहीं है | उसके लिए आप एक व्यक्ति को प्रोडक्शन डिजाइनिंग कम काम दे दीजिए जो बहुत क्रिएटिव और सारे कामों में इंवॉल्व है|  प्रोडक्शन डिजाइनर सबकी वर्क शीट बनाता है . जैसे एक कलाकार सुबह दफ्तर और शाम को वह वापस आकर थक कर बैठा तो उनकी ड्रेसेस चेंज होगी, वह उस पात्र की वर्क शीट में लिखेगा की आपको तीन बार सीन में आना है है पहले आप ऑफिस जाते हुए देखेंगे दूसरे में उसी ड्रेस में वापस आते देखे और थोड़ी देर बाद घर के अंदर तो ड्रेस बदलेगी |  कितने क्लोजअप कितने लॉन्ग शॉट में आना है उनको इकठ्ठा करके एक साथ शूट कर लिया जाता है | केमेरा की पोसिशन बदले बगेर |  क्लोजअप्स  जैसे उसने अपनी पत्नी को गुस्से से बोला कि मैं जब भी आता हूं तुम मेरे को चाय नहीं देती हो तो पत्नी में भी आगे से नाराज होकर बात करती है तो इसमें कौन-कौन क्लोसप  को एक जगह एक साथ शूट कर लिया जाता है .

प्रोडक्शन डिजाइनर यह सारा पेपर वर्क करेगा और उसके पास अगले आने वाले शॉट की तयारी के लिए एक असिस्टेंट होगा | डाइरेक्टर खास तौर पर सिर्फ  फिल्म की फील और कोंटीन्युटी को देखेगा
अब हम आ जाते हैं शूटिंग दिन पर

शूटिंग के दिन प्रोडक्शन डिजाइनर सब पात्रों को काम बताता जाएगा अगला सीन आने वाला है जो उसके लिए पात्रों को एडवांस में तैयार रखेगा | प्रोडक्शन डिजाइनर का एक असिस्टेंट एक लिस्ट बनाएगा की शॉट के कितने टेक हुवे और डायरेक्टर ने कौन सा शॉट  ओके किया . इन शीटों का उपयोग एडिटर के पास होता है जहां सीन्स को सिक्वंस करता है | अगर सारा काम आप लो बजट में कर रहे हैं और खुद ही कर रहे हैं एक बड़ा सिंपल सा एडिटर है माइक्रोसॉफ्ट मूवीमेकर | उससे मजे से आपका बेसिक काम कर सकता है | एडिटिंग में आप एक फोल्डर में सारे क्लिप डाल दीजिए और उसके अंदर सीन  के हिसाब से क्लिप्स का नाम दे दीजिए जैसे सीन नंबर वन टेक नंबर  वगेरह जिस क्लिप की आपको जरूरत पड़ती जा रही है वह अपने प्रोडक्शन की लिस्ट जो है उसको देखते हुए आप उसमें एडिटर से लगवाते जाइए|
एडिटर के पास बैठना बहुत  महत्वपूर्ण हैं आप अपनी साडी गलतियों को यहाँ सीखेंगे. की क्या कैसे किया जाना चाहिए था . बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए संगीत आपको यू ट्यूब पर रोयल्टी फ्री मिल जायेगा | जहाँ से भी लें रोयल्टी फ्री लें वर्ना यू ट्यूब उस पर ऑब्जेक्शन देगा
इस टुटोरिअल को सुनकर इनके पॉइंट्स लिख लीजिये और हर पॉइंट् पर काफी काम कीजिये. अगर फिल्म पहली है तो मेरे से भी संपर्क कर सकते है अगर होम वर्क अच्छा करेंगे .आपकी फिल्म की क्वालिटी, लगने वाला समय और पैसा बचेगा यह मेरी गारंटी है.क्यूंकि कहा जाता है फिल्म ८०% कागज़ पर बनती है

हर काम को पहली फिल्म में बहुत सिंपल रखिए और हर काम को खुद करने की कोशिश करें यह आपको हर बारीकी का अनुभव देगा| जो हर अगली फिल में काम आयेगा

विचार दर्शन चैनल ज्ञान और मनोरंजन पर आधारित चैनल हैं इसी तरह की चीजें आपको मिलेंगी  जो जीवन उपयोगी है यह सामाजिक भी हो सकती है तकनीकी भी हो सकती है टूटोरियल भी हो सकते तो इसे इसमें आने वाले updates से टच में रहने के लिए subscribe कीजिये और आपके कुछ भी Idea मैसेज बॉक्स या ईमेल या एक WhatsApp मोबाइल पर मैसेज दीजिये
आपकी  फिल्म के लिए मेरी शुभ कामनाएं
धन्यवाद